जोधपुर ज़िले की ओसियां विधानसभा सीट पर पानी कभी सिर्फ़ ज़रूरत नहीं, चुनावी मुद्दा भी रहा है। इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर मारवाड़ की कद्दावर नेता और ओसियां की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने अपने पिता व पूर्व जल संसाधन मंत्री स्वर्गीय महिपाल मदेरणा की याद में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक पोस्ट साझा की है। दिव्या ने बताया कि किस तरह उनके पिता ने 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान किया गया ‘हिमालय का पानी’ लाने का वादा पूरा कर ओसियां की महिलाओं के सिर से घड़ों का बोझ उतारने का संकल्प निभाया।
दिव्या की पोस्ट के अनुसार, 2008 के चुनाव प्रचार में महिपाल मदेरणा ने ओसियां की जनता से कहा था कि अगर उन्हें विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ने का अवसर मिला, तो वे हिमालय का मीठा पानी ओसियां तक पहुंचाकर बहनों के सिर से घड़ों का बोझ हटा देंगे। जनता ने उन्हें भारी समर्थन दिया और अशोक गहलोत सरकार में जल संसाधन मंत्री बनते ही उनका पहला हस्ताक्षर ओसियां की पेयजल परियोजना पर हुआ, जिसके तहत रेगिस्तानी इलाके तक दूरस्थ स्रोतों से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।
पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों, विशेषकर ओसियां और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों तक महिलाएं खारे पानी और दूर-दराज़ के जलस्रोतों पर निर्भर रहीं, जहां तक पहुंचने के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। दिव्या ने उन दिनों की मुश्किलों का ज़िक्र करते हुए लिखा कि नहर और पाइपलाइन के जरिए आए मीठे पानी ने न सिर्फ़ लोगों के जीवन स्तर को बदला, बल्कि महिलाओं की रोज़मर्रा की मेहनत और असुरक्षा भी कम की।
पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए दिव्या मदेरणा ने अपने कार्यकाल में ‘जल सेवा’ को राजनीतिक एजेंडे से ऊपर रखते हुए प्राथमिकता दी। उन्होंने अपने क्षेत्र में 103 पानी की टंकियों का निर्माण करवाकर इसे प्रतीकात्मक ‘शतक’ का नाम दिया और इसे एक कर्तव्य-निष्ठ लक्ष्य के रूप में पेश किया, न कि केवल वोट बैंक की राजनीति के रूप में। दिव्या का कहना है कि ओसियां के हर घर तक मीठा पानी पहुंचाना उनके लिए पारिवारिक विरासत, सामाजिक ज़िम्मेदारी और राजनीतिक संकल्प—तीनों का संगम है।
दिव्या की इस सोशल मीडिया पोस्ट के सामने आने के बाद समर्थकों ने मदेरणा परिवार की जल परियोजनाओं और सिंचाई कार्यों को याद करते हुए सोशल मीडिया पर खूब सराहना की। कई बुजुर्गों ने उस दौर की यादें साझा कीं जब पहली बार क्षेत्र में नहर का पानी पहुंचा था और गांवों में टंकियों का निर्माण शुरू हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह पोस्ट केवल स्मृतियों का भावुक बयान नहीं, बल्कि दिव्या की रणनीति का हिस्सा भी है, जिसके जरिए वे अपनी जड़ों, पिता की विकास योजनाओं और अपनी ‘जल सेवा’ की निरंतरता को जनता के सामने मजबूती से रख रही हैं।
ओसियां की राजनीति में मदेरणा परिवार का नाम लंबे समय से सिंचाई और पेयजल योजनाओं से गहराई से जुड़ा रहा है। दिव्या का दोहराया गया संकल्प यह संकेत देता है कि आने वाले समय में भी वे रेगिस्तान में पानी, किसानों के हित और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर मुखर राजनीतिक हस्ती बनी रहेंगी। मारवाड़ की सियासत में ‘हिमालय के पानी’ से शुरू हुई यह कहानी अब ‘103 टंकियों के शतक’ के साथ विरासत और विकास के अनोखे मेल के रूप में देखी जा रही है।


