डूंगरपुर के धूप भरे मैदान में जब यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मंच से कहा, “राज्य पिछड़ा आयोग, निर्वाचन आयोग और हाईकोर्ट जिस दिन कहेंगे, उसी दिन चुनाव हो जाएंगे,” तो लगा जैसे राजस्थान ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के सपने को सबसे पहले हकीकत बनाने की ठान ली है। सितंबर में ही स्वायत्त शासन विभाग ने अपनी सारी तैयारियां पूरी कर लीं। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि दो साल की दृढ़ता का प्रमाण-पत्र था।
मंत्री ने जो दो साल गिनाए, वे वाकई असाधारण हैं। पिछली कांग्रेस सरकार के दौर में पेपर लीक राजस्थान की पहचान बन चुके थे—हर दूसरा पखवाड़ा कोई नया घोटाला, युवाओं का भविष्य दांव पर। आज दो साल बीत गए और एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। परीक्षाएं पारदर्शी हुईं, नकल माफिया जेल में। क्राइम रेट नीचे आया, क्योंकि पुलिस को खुली छूट और राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों मिली।
‘राइजिंग राजस्थान’ की चमक अब कागज से निकलकर धरातल पर दिख रही है। 35 लाख करोड़ के MoU में से 7 लाख करोड़ की परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। 10 दिसंबर को होने वाला प्रवासी राजस्थानी दिवस अब सिर्फ उत्सव नहीं, निवेश का नया द्वार बनेगा। पुराने समझौते तेज होंगे, नए आएंगे।
डूंगरपुर में मुख्यमंत्री जन आवास योजना के नए फ्लैटों का लोकार्पण भी उसी आत्मविश्वास का प्रतीक था—जो सरकार दो साल में गरीबों को पक्का घर, युवाओं को भरोसा और निवेशकों को भरोसा दे सके, वह चुनाव की तारीख चाहे जो हो, जनता का दिल पहले ही जीत चुकी है।
राजस्थान आज कह रहा है—हम तैयार हैं। चुनाव एक साथ हों या अलग-अलग, जनादेश तो पहले से हमारे पास है।


