राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर सोमवार को हो रहे उपचुनाव ने पूरे प्रदेश का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सुबह 7 बजे शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे तक चलेगी, और शुरुआती घंटों से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है।
कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला तीन दिग्गजों के बीच फंसा हुआ माना जा रहा है। भाजपा, कांग्रेस और एक निर्दलीय उम्मीदवार के बीच सीधा त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिल रहा है। हालांकि, किसके पक्ष में हवा बह रही है, यह जानने के लिए सभी को 14 नवंबर तक इंतजार करना होगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशासन ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की है। 3077 पुलिसकर्मी, 95 संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय सशस्त्र बल और 13 अंतरराज्यीय नाके सक्रिय हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है, जबकि जिला मुख्यालय से मतदान प्रक्रिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।
मतदाताओं में दिखा उत्साह
निर्वाचन विभाग के अनुसार, सुबह 10 बजे तक करीब 15 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ठंडी सुबह के बावजूद बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और युवा अपने मत का अधिकार प्रयोग करने पहुंचे। वहीं दोपहर तक यह आंकड़ा तेजी से बढ़ने की संभावना है।
दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर और सहायकों की व्यवस्था की गई है। महिलाओं के लिए विशेष पालना व्यवस्था और मतदान केंद्रों पर वॉलंटियर्स तैनात किए गए हैं।
अंता सीट का राजनीतिक महत्व
अंता सीट का यह उपचुनाव मौजूदा राज्य सरकार के दो साल के कार्यकाल पर एक तरह का जनमत-संग्रह माना जा रहा है। यह सीट पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा को कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद खाली हुई थी। इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है। दोनों ही पार्टियों के शीर्ष नेता लगातार क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं।
हर वोट में छिपा सस्पेंस
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अंता का यह चुनाव न केवल स्थानीय समीकरणों बल्कि प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा को भी तय कर सकता है। जातीय गणित, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
अभी तक यह कहना मुश्किल है कि जीत का झंडा किसके हाथ लगेगा, लेकिन मतदान केंद्रों से आ रही तस्वीरें बताती हैं कि मुकाबला बेहद रोमांचक और सस्पेंस से भरा हुआ है। अब सभी की निगाहें 14 नवंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जब अंता की जनता यह तय करेगी कि अगले ढाई साल तक किसे जनादेश मिलेगा।


