राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के खिलाफ सोमवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने बड़ा प्रदर्शन किया। सैकड़ों छात्रों और युवाओं ने सिविल लाइन्स स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर जमकर नारेबाजी की और सरकार की “निष्क्रियता” के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की हवा को “गैस चेंबर” करार देते हुए तत्काल आपातकालीन कदम उठाने की मांग की।
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। वह ऑक्सीजन सिलिंडर और मास्क पहनकर सांकेतिक विरोध जताने पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास के बाहर सड़क पर लेट गए। उन्होंने कहा, “दिल्ली की हवा अब जहरीली हो चुकी है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सांस लेने में तकलीफ झेल रहे हैं। सरकार के पास न कोई ठोस विज़न है और न ही कोई योजना।” चौधरी ने बताया कि संगठन ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
प्रदर्शन में युवाओं ने हाथों में कई तीखे संदेश वाले पोस्टर थामे हुए थे जिन पर लिखा था— “Right to Live”, “I Miss Breathing”, और “Dear CM, Smog is not a season.” छात्रों ने आरोप लगाया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को “IQ और AQI का फर्क तक नहीं पता”, इसलिए वह वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या पर कोई ठोस नीति नहीं बना पा रहीं।
NSUI नेताओं ने कहा कि सरकार की नाकामी का नतीजा यह है कि दिल्ली की हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। प्रदर्शनकारी युवाओं ने कहा कि पिछले कई वर्षों से सर्दियों के मौसम में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है, लेकिन न सरकार के पास दीर्घकालिक योजना है और न ही कोई ठोस कदम उठाए गए हैं।
वरुण चौधरी ने दिल्ली और केंद्र—दोनों सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “यह शर्मनाक है कि दोनों सरकारें एक-दूसरे पर दोष डालने में व्यस्त हैं, जबकि दिल्लीवासी हर दिन जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। यह केवल राजनीति का मुद्दा नहीं है, यह हमारे ‘Right to Breathe’ और ‘Right to Life’ का सवाल है।”
NSUI ने मांग की कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार मिलकर तुरंत एक ‘संयुक्त आपातकालीन कार्ययोजना’ (Joint Emergency Response Plan) तैयार करें, ताकि हवा की गुणवत्ता में जल्द सुधार लाया जा सके। चौधरी ने चेतावनी दी कि जब तक मुख्यमंत्री छात्रों से मिलकर ठोस कदमों की घोषणा नहीं करेंगी, तब तक NSUI का धरना जारी रहेगा।
धरने के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक पीछे हटने की अपील की, लेकिन छात्रों ने साफ कहा कि वे तब तक नहीं हटेंगे जब तक सरकार जनता को ‘सांस लेने का अधिकार’ नहीं दिलाती। बढ़ते प्रदूषण पर यह प्रदर्शन राजधानी में राजनीतिक तापमान और बढ़ा सकता है।


