Bihar Elections 2025: पहले चरण में जोश से भरे मतदाता, 18 जिलों में शांतिपूर्ण मतदान जारी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान जारी है। 3.75 करोड़ से अधिक मतदाता आज अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

spot_img

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण गुरुवार सुबह 7 बजे से शुरू हो गया। राज्य के 18 जिलों में मतदान का माहौल पूरी तरह जोश और उम्मीद से भरा हुआ है। सुबह से ही पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अपील — लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर करें भागीदारी

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बिहार की जनता से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा, “आज लोकतंत्र के महापर्व का पहला चरण प्रारंभ हुआ है। सभी मतदाताओं से मेरा आग्रह है कि वे पूरे उत्साह, जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ अपने मताधिकार का उपयोग करें।” उन्होंने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को विशेष बधाई दी और कहा कि युवाओं की भागीदारी ही लोकतंत्र की सच्ची ताकत है।

18 जिलों में चल रहा मतदान, 121 सीटों पर मुकाबला रोमांचक

पहले चरण में राज्य के 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इस चरण में कुल 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1192 पुरुष और 122 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। इन सीटों पर मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के बीच देखने को मिल रहा है, जबकि कुछ सीटों पर क्षेत्रीय दलों की उपस्थिति भी समीकरण बिगाड़ सकती है।

ग्रामीण इलाकों में भारी मतदान, शहरों में रुझान धीमा

चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 45,341 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 36,733 ग्रामीण और 8,608 शहरी इलाकों में हैं। शुरुआती रुझान बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में वोटिंग दर अपेक्षाकृत अधिक है, जबकि शहरी मतदाताओं की सक्रियता कुछ धीमी रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार, किसान सहायता और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे वोटिंग पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।

मतदाताओं की संख्या और सुरक्षा इंतज़ाम

पहले चरण के चुनाव में 3 करोड़ 75 लाख 13 हजार 302 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1 करोड़ 98 लाख 35 हजार 325 पुरुष, 1 करोड़ 76 लाख 77 हजार 219 महिलाएं और 758 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। सुरक्षा के लिए राज्यभर में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है, वहीं प्रत्येक बूथ पर वेबकास्टिंग की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके।

महिला और दिव्यांग प्रबंधन वाले मतदान केंद्र बने मिसाल

इस चरण में 320 आदर्श मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 926 केंद्र पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जबकि 107 केंद्रों का प्रबंधन दिव्यांग कर्मचारी कर रहे हैं। यह व्यवस्था न केवल समावेशी लोकतंत्र की झलक देती है बल्कि आयोग की पारदर्शिता और सामाजिक संवेदनशीलता की भी मिसाल है।

युवाओं में उत्साह, पहली बार वोट डालने वालों की संख्या में इजाफा

इस बार बड़ी संख्या में युवा मतदाता पहली बार मतदान प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं। कई जगहों पर कॉलेज छात्रों ने सुबह-सुबह लाइनों में लगकर लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाई। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि युवा मतदाता इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।

मुख्य दलों की निगाहें पहले चरण पर टिकीं

पहला चरण इस चुनाव की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस सभी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एनडीए जहां विकास और स्थिरता के मुद्दे पर वोट मांग रहा है, वहीं विपक्ष बेरोज़गारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहा है। इस चरण के परिणाम से आगामी चरणों की रणनीति पर भी सीधा असर पड़ेगा।

चुनाव आयोग की निगरानी में सुचारु मतदान प्रक्रिया

चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या दबाव की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होगी। सभी मतदान केंद्रों पर CCTV और वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों की टीमें लगातार बूथों का दौरा कर रही हैं।

पहले चरण के मतदान से तय होगी चुनावी हवा

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार के इस पहले चरण के मतदान से ही यह संकेत मिल जाएगा कि जनता किस ओर झुकाव रखती है। अगर ग्रामीण इलाकों में मतदान का प्रतिशत ऊँचा रहा तो इसका फायदा विपक्षी गठबंधन को मिल सकता है, जबकि शहरी और मध्यम वर्गीय मतदाताओं का अधिक मतदान एनडीए के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

निष्कर्ष: लोकतंत्र के पर्व में बढ़ती भागीदारी का संकेत

पहले चरण के मतदान ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की जनता इस बार मुद्दों पर वोट देना चाहती है। मतदाताओं में लोकतांत्रिक चेतना और जागरूकता दोनों बढ़ी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 14 नवंबर को जब परिणाम आएंगे, तो यह लोकतांत्रिक उत्सव किसके चेहरे पर मुस्कान लाएगा — सत्तारूढ़ गठबंधन या विपक्षी मोर्चे पर।

आर्यन जाखड़
आर्यन जाखड़http://politicsheadline.in
आर्यन जाखड़ एक राजनीतिक और व्यापारिक समाचार लेखक हैं, जो भारतीय शासन, चुनाव और आर्थिक रुझानों पर अपनी सटीक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। आर्यन जाखड़, पॉलिटिक्स हैडलाइन के प्रधान संपादक हैं।

ताज़ातरीन खबरें

spot_imgspot_img

यह भी पढ़ें

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img