राजस्थान में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शहरी विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने निकाय चुनावों को लेकर बड़ा बयान दिया। इस मौके पर उन्होंने ‘एकता मार्च’ में हिस्सा लिया और पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि स्वतंत्रता हमें विदेशी आक्रांताओं के अत्याचार और लंबे संघर्ष के बाद मिली है, इसलिए इसे बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
मंत्री खर्रा ने बताया कि राज्य सरकार और स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश के सभी 300 नगरीय निकायों में चुनाव कराने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। विभागीय स्तर पर सभी आवश्यक कार्य पूरे हो चुके हैं और गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार 1 नवंबर तक चुनाव करवाने की सिफारिश राज्य निर्वाचन आयोग को भेजने की स्थिति में है।
चार दिन में भेजी जाएगी सिफारिश
खर्रा ने बताया कि वर्तमान में राज्य ओबीसी आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के स्तर पर कुछ तकनीकी कार्य शेष हैं। जैसे ही ओबीसी वर्गों से संबंधित आंकड़े और मतदाता सूचियों का प्रकाशन पूरा हो जाएगा, सरकार चार दिनों के भीतर चुनाव की सिफारिश भेज देगी। मंत्री ने यह भी कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा SIR की घोषणा के बाद यह प्रक्रिया और तेजी से आगे बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि निकाय चुनावों को समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए ताकि स्थानीय निकायों में लोकतंत्र मजबूत हो सके।
संतान संबंधी नियम पर पुनर्विचार
संतान संबंधी नियमों में संशोधन को लेकर मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि 1995 में स्वायत्त शासन और पंचायतीराज विभाग में दो संतान नियम लागू किया गया था, जिसे 2002 में सरकारी कर्मचारियों पर भी लागू किया गया। 2018 में इसमें कुछ रियायतें दी गई थीं। अब सरकार इस नियम में और राहत देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
खर्रा ने कहा कि जब सरकारी कर्मचारियों को छूट दी जा सकती है, तो जनप्रतिनिधियों को भी समान राहत मिलनी चाहिए। युवाओं और प्रतिनिधियों की मांग पर सरकार संतुलित बदलाव करने पर विचार कर रही है।
SIR पर नहीं आई कोई आपत्ति
बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों को लेकर उठे विवादों पर झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि बिहार में SIR लागू होने के बाद किसी ने भी निर्वाचन आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज नहीं कराई, जिसका अर्थ है कि हटाए गए नाम उचित प्रक्रिया से हटाए गए। वहीं पश्चिम बंगाल में एक करोड़ से अधिक फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ने के आरोप लगाए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि राजस्थान में ऐसी कोई समस्या नहीं है और राज्य सरकार मतदाता सूचियों को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निकाय चुनाव निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कराए जाएंगे।


