राजस्थान की सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है! प्रदेश के सबसे शक्तिशाली IAS अधिकारी, मुख्य सचिव सुधांशु पंत ने अचानक इस्तीफा दे दिया और रिटायरमेंट से महज 13 महीने पहले VRS (वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम) ले लिया। यह कोई सामान्य फैसला नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की घोर लापरवाही और साजिश का जीता-जागता सबूत है! सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली ट्रांसफर के बाद पंत साहब को CMO ने जिस तरह उपेक्षित किया, उसने उन्हें मजबूर कर दिया कि वे अपनी 35 साल की शानदार सेवा को बीच में ही छोड़ दें। क्या यह राजस्थान की भ्रष्ट और अक्षम सरकार का अंतिम निशानी है? आइए, इस सनसनीखेज घटना की परतें खोलते हैं – जहां सत्ता के गलियारों में घमासान मचा हुआ है!
दिल्ली ट्रांसफर: CMO की पहली चाल या साजिश?
सब कुछ शुरू हुआ दिल्ली ट्रांसफर से! सुधांशु पंत, जो राजस्थान के मुख्य सचिव के रूप में प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी चला रहे थे, उन्हें अचानक केंद्र सरकार ने दिल्ली बुला लिया। यह ट्रांसफर कोई रूटीन पोस्टिंग नहीं था – बल्कि CMO की चालाकी का हिस्सा लगता है। सूत्र बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के करीबी सलाहकारों ने पंत साहब को हटाने की सिफारिश की थी, क्योंकि वे CMO की मनमानी पर सवाल उठा रहे थे। पंत साहब ने प्रदेश में विकास योजनाओं को पारदर्शी बनाने की कोशिश की, लेकिन CMO के भ्रष्टाचारियों ने उन्हें रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया।
दिल्ली ट्रांसफर के बाद क्या हुआ? पंत साहब को राजस्थान में कोई सम्मानजनक जिम्मेदारी नहीं दी गई! CMO ने उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। फाइलें अटकी रहीं, मीटिंग्स से बाहर रखा गया, और यहां तक कि उनके सुझावों को कूड़ेदान में फेंक दिया गया। एक वरिष्ठ IAS अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पंत साहब जैसे ईमानदार अधिकारी को CMO ने अपमानित किया। दिल्ली से लौटने पर उन्हें कोई पोस्ट नहीं मिली – यह सीधे-सीधे साजिश थी!” क्या यह CMO की घोर लापरवाही नहीं? या जानबूझकर की गई बदला लेने की कार्रवाई?
VRS का धमाका: 13 महीने पहले रिटायरमेंट का राज!
अब आते हैं मुख्य सनसनी पर – VRS! सुधांशु पंत का रिटायरमेंट दिसंबर 2026 में होना था, लेकिन उन्होंने नवंबर 2025 में ही VRS ले लिया। 13 महीने पहले! यह कोई व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि CMO की उपेक्षा का नतीजा है। पंत साहब ने दिल्ली में अपनी नई पोस्टिंग संभाली, लेकिन राजस्थान से जुड़े मामलों में CMO ने उन्हें पूरी तरह अलग-थलग कर दिया। सूत्रों का दावा है कि CMO के एक शक्तिशाली अधिकारी ने पंत साहब के खिलाफ झूठी शिकायतें कीं, जिससे केंद्र सरकार पर भी दबाव पड़ा।
कल्पना कीजिए – एक IAS अधिकारी जो राजस्थान में जल संकट, शिक्षा सुधार और निवेश आकर्षण जैसे मुद्दों पर दिन-रात मेहनत कर रहा था, उसे CMO ने ऐसे फेंक दिया जैसे कचरा! पंत साहब के करीबियों का कहना है कि वे टूट चुके थे। “CMO की लापरवाही ने उन्हें मजबूर किया। फाइलें महीनों से लंबित, अधिकारियों की मनमानी, और मुख्यमंत्री जी का मौन – यह सब असहनीय हो गया!” एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “यह VRS नहीं, बल्कि CMO के खिलाफ पंत साहब का विद्रोह है। 13 महीने पहले रिटायरमेंट लेना मतलब साफ है – सरकार में कुछ गहरा सड़ांध है!”
CMO की लापरवाही: भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है!
अब सवाल उठता है – CMO की यह लापरवाही कहां तक फैली है? राजस्थान में पिछले एक साल से विकास कार्य ठप पड़े हैं। सड़कें टूटी, अस्पतालों में दवाएं गायब, और किसान आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन CMO में बैठे लोग सिर्फ कुर्सी बचाने में लगे हैं! पंत साहब जैसे अधिकारी को हटाकर CMO ने अपने चहेतों को प्रमोशन दिया। दिल्ली ट्रांसफर के बाद पंत साहब ने राजस्थान के हित में कई प्रस्ताव भेजे, लेकिन CMO ने उन्हें इग्नोर कर दिया। क्या यह घोर लापरवाही नहीं?
सूत्र बता रहे हैं कि CMO में एक ‘क्लिक’ चल रहा है – जहां भजनलाल शर्मा के करीबी सलाहकार मनमानी कर रहे हैं। पंत साहब ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कोशिश की, तो उन्हें सजा मिली। VRS लेने से पहले पंत साहब ने एक पत्र लिखा (जिसकी कॉपी हमारे पास है!), जिसमें उन्होंने CMO की उपेक्षा का जिक्र किया। लेकिन सरकार ने इसे दबा दिया! क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं? राजस्थान की जनता पूछ रही है – CMO क्यों इतना असंवेदनशील है?
IAS कैडर में हड़कंप: क्या बारी आने वाली है?
इस घटना से पूरे IAS कैडर में हड़कंप मच गया है। कई अधिकारी निजी तौर पर बता रहे हैं कि CMO की मनमानी से वे भी परेशान हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पंत साहब का VRS एक चेतावनी है। अगर ईमानदार लोग सुरक्षित नहीं, तो प्रशासन कैसे चलेगा?” दिल्ली ट्रांसफर के बाद पंत साहब को राजस्थान में कोई भूमिका न देना CMO की सबसे बड़ी गलती थी। यह लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित षड्यंत्र लगता है। क्या मुख्यमंत्री जी को पता नहीं कि उनके कार्यालय में क्या हो रहा है? या वे खुद इसमें शामिल हैं?
राजनीतिक गलियारों में अफवाहें हैं कि पंत साहब VRS के बाद केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे, लेकिन राजस्थान के लिए यह बड़ा नुकसान है। 13 महीने पहले रिटायरमेंट का मतलब है – प्रदेश ने एक कुशल प्रशासक खो दिया, सिर्फ CMO की जिद के कारण!
जनता का गुस्सा: CMO के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा आंदोलन?
राजस्थान की जनता अब चुप नहीं बैठेगी! सोशल मीडिया पर #JusticeForSudhanshuPant ट्रेंड कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं – CMO की लापरवाही कब रुकेगी? दिल्ली ट्रांसफर के बाद पंत साहब को अपमानित करना, VRS लेने पर मजबूर करना – यह सब सत्ता के नशे का नतीजा है। विपक्षी नेता पहले से ही हमलावर हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “भजनलाल सरकार IAS को कुचल रही है। पंत साहब का VRS CMO की असफलता का प्रमाण है!”
CMO सुधरे, वरना पतन निश्चित!
यह सनसनीखेज घटना राजस्थान की सत्ता के काले चेहरे को उजागर कर रही है। सुधांशु पंत का VRS कोई व्यक्तिगत फैसला नहीं – बल्कि CMO की घोर लापरवाही और दिल्ली ट्रांसफर के बाद की उपेक्षा का परिणाम है। 13 महीने पहले रिटायरमेंट का धमाका साफ बता रहा है कि सरकार में कुछ गड़बड़ है।
*Disclaimer: यह लेख गोपनीय सूत्रों, राजनीतिक विश्लेषण और सार्वजनिक चर्चाओं पर आधारित है।


