28 अक्टूबर 2025 को राजस्थान सहित 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम की शुरुआत ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की 27 अक्टूबर की घोषणा के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोल दिया। राजस्थान में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा पर SIR को ‘वोट चोरी’ का हथियार बताते हुए पंचायत-निकाय चुनाव टालने की साजिश का आरोप लगाया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को ही ऐतिहासिक ‘वोट चोरी’ का दोषी ठहराया। लेकिन मीडिया तो इसे साधारण आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई मान रहा है। असली कहानी इससे कहीं गहरी है: SIR अब ‘डेमोग्राफिक इंजीनियरिंग’ (जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग) का राजनीतिक जुआ बन चुका है, जहां वोटर लिस्ट को सत्ता के लिए जनसांख्यिकीय हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। यह दृष्टिकोण, जो SIR को जाति-जनसंख्या आधारित ‘सामाजिक इंजीनियरिंग’ के चश्मे से देखता है – जहां दल अल्पसंख्यक-ओबीसी वोट काटकर बहुसंख्यक वोटबैंक मजबूत करने की होड़ में हैं – किसी मीडिया हाउस ने अभी तक नहीं अपनाया।
डोटासरा का हमला: SIR से ‘वोट चोरी’ का डर
डोटासरा ने साफ कहा, “भाजपा का असली मकसद वोट चोरी करना और चुनाव टालना है। बिहार में SIR से 65 लाख वोट कटे, वही खेल यहां खेला जा रहा।” उन्होंने ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ को भी ‘लोकतंत्र का बहाना’ बताया, जो पंचायतों को अधिकारियों के हवाले करने का रास्ता खोल रहा है। ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट लटकाने से जुलाई-अगस्त 2026 से पहले चुनाव असंभव हैं। यह आरोप सतही लगते हैं, लेकिन जनसांख्यिकीय कोण से देखें तो SIR राजस्थान के 5.48 करोड़ वोटरों में ओबीसी (52%) और अल्पसंख्यक (17%) वोट काटने का माध्यम बन सकता है। ग्रामीण राजस्थान, जहां 70% वोटर हैं, में मीणा-गुर्जर-जाट समीकरण पहले से तनावपूर्ण हैं। SIR के BLO सर्वे से ‘डुप्लीकेट’ या ‘मृत’ नाम काटे जाएंगे, लेकिन वास्तव में यह प्रवासी मजदूरों (ज्यादातर ओबीसी) के नामों को लक्षित कर सकता है, जो कांग्रेस का मजबूत वोटबैंक हैं। डोटासरा का बयान इस ‘इंजीनियरिंग’ का अलार्म है, जो भाजपा को गुर्जर-जाट बहुसंख्यक वोट से फायदा पहुंचाएगा।
राठौड़ का पलटवार: कांग्रेस का ‘ऐतिहासिक पाप’
राठौड़ ने जवाब दिया, “कांग्रेस ने 50 बार चुनी हुई सरकारें बर्खास्त कीं, 1992 में पांच राज्यों में BJP सरकारें गिराईं। SIR से 18 साल के युवाओं के नाम जुड़ेंगे, मृतकों के कटेंगे। आपने बांग्लादेशी-रोहिंग्या को वोटर बनाया!” यह बयान न केवल बचाव है, बल्कि हमला है। लेकिन जनसांख्यिकीय नजरिए से, राठौड़ का ‘रोहिंग्या’ जिक्र SIR को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का हथियार बनाने की कोशिश दिखाता है। राजस्थान में सीमावर्ती जिलों (जैसलमेर, बाड़मेर) में प्रवासी मुस्लिम वोटरों के नाम काटना भाजपा को ‘राष्ट्रीयवादी’ छवि देगा। X पर #SIR_विवाद के तहत BJP समर्थक पोस्ट्स में ‘अवैध घुसपैठिए वोटर’ का नैरेटिव ट्रेंड कर रहा है, जो 2024 लोकसभा चुनावों की ‘घुसपैठ’ बहस को दोहराता है। यह इंजीनियरिंग का हिस्सा है: SIR से अल्पसंख्यक नाम काटकर हिंदू बहुसंख्यक वोटबैंक (जाट-राजपूत) को मजबूत करना, जो भाजपा का कोर है। राठौड़ का ऐतिहासिक रेफरेंस (बाबासाहेब को हराना) भी जातिगत ध्रुवीकरण का संकेत है, जहां SIR ओबीसी आरक्षण विवाद को हवा देगा।
अनोखा कोण: SIR की जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग
यह विवाद आरोप-प्रत्यारोप से आगे है; यह ‘डेमोग्राफिक इंजीनियरिंग’ का खेल है। राजस्थान में 2023 विधानसभा चुनावों में जाति ने 60% वोट तय किए थे – जाट (15%), मीणा (10%), गुर्जर (8%)। SIR के फरवरी 2026 प्रकाशन से पंचायत चुनाव टलेंगे, जो ग्रामीण ओबीसी-दलित प्रतिनिधित्व को प्रभावित करेगा। सुप्रीम कोर्ट के 2022 फैसले के तहत ओबीसी आरक्षण के लिए कमीशन जरूरी है, लेकिन अप्रैल 2025 में बने कमीशन को फंड-स्टाफ की कमी से रिपोर्ट लेट हो रही। भाजपा इसे ‘शुद्धिकरण’ कह रही, लेकिन वास्तव में यह जनसंख्या ‘री-कॉन्फिगरेशन’ है: प्रवासी/घुमंतू (70% ओबीसी) नाम काटकर स्थानीय बहुसंख्यक (भाजपा समर्थक) को बढ़ावा। बिहार SIR से 65 लाख नाम कटे, ज्यादातर मुस्लिम-यादव (विपक्षी) – राजस्थान में भी मीणा-मुस्लिम वोट कटने का खतरा। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ इस इंजीनियरिंग का कवर है, जो स्थानीय चुनावों को केंद्रीय एजेंडे से जोड़कर विपक्ष को कमजोर करेगा। X पर 27 अक्टूबर से #SIR_Rajasthan के 5,000+ पोस्ट्स में 40% ‘घुसपैठिए वोटर’ पर फोकस, जो भाजपा का नैरेटिव सेट कर रहा।
प्रभाव: ग्रामीण लोकतंत्र पर संकट
इस इंजीनियरिंग का असर ग्रामीण राजस्थान पर पड़ेगा, जहां 40,000 पंचायतें हैं। चुनाव टलने से मौजूदा भाजपा नियंत्रित निकाय अधिकारीयों के हवाले रहेंगे, जो बजट वितरण में पक्षपात करेंगे। ओबीसी (52% आबादी) आरक्षण लटकेगा, जो कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर, 12 राज्यों में SIR (यूपी, एमपी सहित) भाजपा शासित राज्यों में वोटबैंक ‘री-इंजीनियर’ करेगा। डोटासरा की ‘सतर्कता’ अपील सही है, लेकिन जनसांख्यिकीय चाल से विपक्ष को सड़क पर उतरना पड़ेगा। राठौड़ का ‘युवा नाम जोड़ना’ दावा सकारात्मक लगता है (8,540 नए वोटर), लेकिन वास्तव में यह ‘चुनिंदा जोड़’ हो सकता है – भाजपा समर्थक युवाओं को प्राथमिकता।
निष्कर्ष: जुआ, जहां हार जनता की होगी
SIR विवाद सतही बवाल नहीं, बल्कि जनसांख्यिकीय जुआ है। भाजपा इसे ‘शुद्धिकरण’ कहकर वोटबैंक मजबूत कर रही, जबकि कांग्रेस ‘लोकतंत्र हत्या’ चिल्ला रही। लेकिन असली हार ग्रामीण-ओबीसी-महिलाओं की होगी, जिनके वोट ‘इंजीनियर’ हो जाएंगे। यदि EC निष्पक्ष नहीं रही, तो 2026 चुनाव पूर्वाग्रहित होंगे। राजस्थान की जनता को यह जुआ समझना होगा – वोटर लिस्ट सिर्फ कागज नहीं, बल्कि सत्ता का हथियार है। डोटासरा-राठौड़ की लड़ाई इस जुए का पहला राउंड है; अगला राउंड सड़कों पर होगा।


