राजस्थान में अपराध जगत की जड़ें काटने के लिए सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर गठित एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने न केवल प्रदेश के भीतर बल्कि विदेशों तक अपनी पहुंच बनाकर बड़ा अभियान शुरू किया है। यह वही टास्क फोर्स है जिसने लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे बड़े गैंगस्टरों के नेटवर्क को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। अब AGTF ने इन गैंग्स से जुड़े 12 मोस्ट वांटेड अपराधियों पर फोकस किया है, जिनके खिलाफ इंटरपोल (Interpol) ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए हैं।
एडीजी दिनेश एम.एन ने बताया कि टास्क फोर्स ने पिछले कुछ महीनों में गैंगस्टर नेटवर्क की गहराई से जांच कर कई अहम खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया है कि लॉरेंस और गोदारा गैंग से जुड़े ये 12 आरोपी फर्जी पासपोर्ट और पहचान पत्रों की मदद से विदेश भाग चुके हैं। इनमें से कई दुबई, कनाडा और अमेरिका में डंकी रूट के जरिए शरण लेकर वहां से अपने गिरोह को ऑपरेट कर रहे हैं। इनमें कुख्यात अपराधी आनंदपाल सिंह का करीबी सुभाष बराल उर्फ सुभाष मूंड और उसका साथी ईश्वर कुमावत भी शामिल है, जो फिलहाल दुबई में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
इसी तरह सीकर जिले के रिणाउ गांव का निवासी राहुल रिणाउ उर्फ राहुल स्वामी, जो रोहित गोदारा गैंग का करीबी माना जाता है, वह भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश में छिपा है। वहीं, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में वांछित महेंद्र मेघवाल और अलवर के हैरी बॉक्सर (हरिचंद) के बारे में भी यही जानकारी मिली है कि वे विदेश से नेटवर्क चला रहे हैं।
टास्क फोर्स की जांच से यह भी खुलासा हुआ है कि इन गैंगस्टरों ने अपने नेटवर्क को “कॉर्पोरेट स्टाइल” में ढाल दिया है। इनके गिरोह में भर्ती की प्रक्रिया इंटरव्यू के जरिए होती थी, जबकि फिरौती, जमीन कब्जे और लोन रिकवरी जैसी वारदातों को “कॉन्ट्रैक्ट बेस” पर अंजाम दिया जाता था। पुलिस ने अब ऐसे अपराधियों के खिलाफ मनी ट्रेल, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन के जरिए सबूत जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
एडीजी दिनेश एम.एन. ने बताया कि बीते एक साल में AGTF की मदद से विदेशों में पांच बड़े गैंगस्टर पकड़े गए हैं। इनमें गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा, अमित शर्मा उर्फ जैक पंडित, अमरजीत बिश्नोई और आदित्य जैन उर्फ टोनी शामिल हैं। अब अगला चरण इन 12 वांटेड अपराधियों को पकड़ने का है, जिनके लिए केंद्र सरकार और इंटरपोल से समन्वय बनाकर कार्रवाई की जा रही है।
राजस्थान पुलिस का कहना है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक प्रदेश को अपराधमुक्त नहीं बनाया जाता। पुलिस का लक्ष्य केवल अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क और सपोर्ट सिस्टम को भी पूरी तरह तोड़ना है। यह ऑपरेशन राजस्थान में कानून-व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।


