जयपुर में अब एक ही नगर निगम: हेरिटेज और ग्रेटर का विलय, नई व्यवस्था लागू

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राजधानी जयपुर में शुक्रवार (10 नवंबर) से बड़ा प्रशासनिक बदलाव लागू हो गया है। अब शहर में दो नहीं, बल्कि एक ही नगर निगम काम करेगा। सरकार के इस फैसले के बाद जयपुर हेरिटेज नगर निगम और जयपुर ग्रेटर नगर निगम दोनों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। इसके साथ ही अब पूरे शहर का संचालन “जयपुर नगर निगम” के नाम से होगा। निगम के दफ्तरों, साइनबोर्ड्स और आधिकारिक पत्रों से “ग्रेटर” शब्द हटा दिया गया है।

एकीकृत ढांचे से प्रशासनिक कामकाज होगा सरल

नई व्यवस्था के तहत अब शहर की तमाम शहरी सेवाओं का संचालन एक ही प्रशासनिक ढांचे से होगा। इससे नागरिकों को दस्तावेज़ों और अनुमतियों के लिए अलग-अलग निगमों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, विवाह पंजीकरण, भवन निर्माण अनुमति, और संपत्ति कर जैसे सभी काम अब “जयपुर नगर निगम” के अंतर्गत आएंगे। अधिकारी मानते हैं कि इससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी।

वेबसाइट और पोर्टल पर भी होगा बदलाव

नगर निगम जयपुर की आधिकारिक वेबसाइट को भी अपडेट किया जा रहा है ताकि सभी नागरिक सेवाएं एक ही पोर्टल पर उपलब्ध हों। तकनीकी टीम नए वार्डों, कर सीमाओं और प्रशासनिक विभागों के अनुसार ऑनलाइन ढांचे को एकीकृत कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि अब नागरिक किसी भी प्रकार की ऑनलाइन सेवा के लिए अलग-अलग पोर्टल पर नहीं जाएंगे — सभी सूचनाएं और फॉर्म “जयपुर नगर निगम” की एक ही वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगे।

फिलहाल प्रशासक संभालेंगे जिम्मेदारी

नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निगम का संचालन संभागीय आयुक्त के अधीन रहेगा, जो प्रशासक के रूप में काम करेंगे। इस दौरान निगम की वित्तीय और नीतिगत निर्णय प्रक्रिया उन्हीं के माध्यम से चलेगी। जैसे ही नए सिरे से वार्ड परिसीमन और चुनाव पूरे होंगे, लोकतांत्रिक बोर्ड को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

जोधपुर में भी दो निगमों का हुआ था विलय

जयपुर से पहले जोधपुर में भी यही प्रशासनिक प्रयोग किया गया था। वहां उत्तर और दक्षिण नगर निगम को खत्म कर एक ही जोधपुर नगर निगम में विलय कर दिया गया। पहले उत्तर निगम में कांग्रेस का बोर्ड था जबकि दक्षिण निगम में भाजपा की सत्ता थी। दोनों में 80-80 पार्षद थे। अब सरकार ने दोनों को मिलाकर एक निगम में 100 वार्डों का नया ढांचा लागू किया है। इससे जोधपुर में भी प्रशासनिक खर्च और प्रक्रियाओं में काफी सरलता आई है।

एक शहर, एक निगम—सरकार का नया शहरी मॉडल

राज्य सरकार का मानना है कि “वन सिटी, वन कॉरपोरेशन” मॉडल से शहरों में एकीकृत विकास को बढ़ावा मिलेगा। जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों में दो निगमों के चलते अधिकारों का टकराव, संसाधनों का बंटवारा और निर्णयों में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही थीं। अब एक ही निगम के तहत पूरे शहर के विकास कार्य, सफाई व्यवस्था, रोड नेटवर्क, जल वितरण और कर संग्रह जैसी सभी सेवाओं की निगरानी एक साथ की जाएगी।

आर्यन जाखड़
आर्यन जाखड़http://politicsheadline.in
आर्यन जाखड़ एक राजनीतिक और व्यापारिक समाचार लेखक हैं, जो भारतीय शासन, चुनाव और आर्थिक रुझानों पर अपनी सटीक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। आर्यन जाखड़, पॉलिटिक्स हैडलाइन के प्रधान संपादक हैं।

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