राजस्थान के शाहपुरा के नया बास निवासी और कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्र राहुल घोसल्या की रविवार को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में मौत हो गई। पिछले 12 दिनों से डॉक्टरों की टीम उसकी जिंदगी बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही थी, लेकिन आखिरकार राहुल ने जिंदगी की जंग हार दी।
राहुल के निधन की खबर मिलते ही शाहपुरा और जयपुर दोनों जगहों पर शोक की लहर दौड़ गई। राहुल को 21 अक्टूबर को एयर एम्बुलेंस के जरिए कजाकिस्तान से जयपुर लाया गया था। वह कजाकिस्तान के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के छात्र थे, जब 8 अक्टूबर को कॉलेज की लाइब्रेरी में पढ़ाई करते वक्त उन्हें अचानक तेज चक्कर आए और उल्टियां शुरू हो गईं। जांच में ब्रेन हेमरेज की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

कजाकिस्तान में हालत बिगड़ने के बाद कई सामाजिक संगठनों और परिवार की अपील पर एयर एम्बुलेंस से उन्हें भारत लाया गया। जयपुर पहुंचने पर राहुल को एसएमएस अस्पताल के न्यूरो वार्ड में भर्ती किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनका इलाज कर रही थी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कुछ दिन पहले एसएमएस अस्पताल जाकर राहुल का हालचाल जाना था और डॉक्टरों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए थे। इसके अलावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी अस्पताल पहुंचे थे।
रविवार सुबह डॉक्टरों ने राहुल को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी स्थिति गंभीर बनी रही। आखिरकार उन्होंने अंतिम सांस ली। राहुल की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। उनकी मां और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
राहुल के निधन पर कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा, “जयपुर के शाहपुरा निवासी MBBS छात्र राहुल घोसल्या के असामयिक निधन की खबर अत्यंत दुखद है। ईश्वर उनके परिवार को यह असहनीय पीड़ा सहने की शक्ति दें।”
राहुल की कहानी उन हजारों भारतीय छात्रों की पीड़ा को उजागर करती है जो विदेशों में बेहतर शिक्षा की तलाश में जाते हैं, लेकिन किसी आपात स्थिति में इलाज और मदद की सीमित व्यवस्था के कारण उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।


