जयपुर की हवा हुई बेहद जहरीली, बढ़ते प्रदूषण से लोगों की सेहत पर भी पद रहा असर

जयपुर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, AQI 250 के करीब। बढ़ती बीमारियों से अस्पतालों में भीड़, लोगों को मास्क और सावधानी बरतने की सलाह।

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मौसम के करवट लेते ही राजस्थान की राजधानी जयपुर की हवा बेहद जहरीली होती जा रही है। पिछले कुछ दिनों में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार बढ़कर खतरनाक स्तर के आसपास पहुंच गया है, जिससे लोगों का सुबह या देर रात घर से बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है। जयपुर का औसत AQI इन दिनों करीब 250 के आसपास दर्ज किया जा रहा है, जो निश्चित रूप से ‘खराब से बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। यह जहरीली हवा धीरे-धीरे लोगों की सांसों में घुल रही है और उन्हें ऐसी बीमारियों की ओर धकेल रही है जिनका असर लंबे समय तक रहता है।

जयपुर ही नहीं, राजस्थान के कई अन्य शहर भी इसी संकट से जूझ रहे हैं। खाटू श्यामजी की नगरी सीकर में बीते दिनों प्रदूषण का स्तर अचानक इतना बढ़ गया कि एक ही इलाके में 24 घंटे के भीतर 100 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह स्थिति बताती है कि राज्य में वायु प्रदूषण किस स्तर पर पहुंच चुका है और यह लोगों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।

जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार महावर बताते हैं कि प्रदूषण के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है। उनकी मानें तो हवा में मौजूद कण शरीर में प्रवेश कर सांस की नलियों को सूजनयुक्त बना रहे हैं, जिससे अस्थमा, एलर्जी, खांसी, आंखों में जलन जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं। कई मरीज तो ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे पुराने रोगों के बढ़ने की शिकायत भी कर रहे हैं।

बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है। डॉक्टरों की सलाह है कि बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें और सुबह-शाम खुले में व्यायाम से बचें। साथ ही घरों में एयर प्यूरीफायर, पौधों और वेंटिलेशन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

इसी बीच जयपुर में प्रदूषण मॉनिटरिंग सिस्टम भी सवालों के घेरे में है। राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने शहर में लगभग 10 बड़े डिस्प्ले बोर्ड लगाए हैं, लेकिन आदर्शनगर इलाके में लगा बोर्ड आधा खराब है। इसका डिस्प्ले धुंधला है और कई डेटा पूरी तरह पढ़ा भी नहीं जा सकता। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि प्रदूषण को मापने वाली मशीनें ही ठीक नहीं हैं तो प्रदूषण नियंत्रित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी।

जयपुर के सीतापुरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक पाया जाता है, लेकिन शहरी आवासीय इलाकों में भी स्थिति लगभग समान ही है। सड़कों पर चलते लोगों के चेहरे पर मास्क या कपड़ा दिखाई देना अब आम हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हवा की खराब गुणवत्ता के कारण सिर दर्द, उलझन, थकान और आंखों में जलन जैसी समस्याएँ बढ़ गई हैं। कई लोग सुबह के समय बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं।

कुल मिलाकर, जयपुर की हवा इस समय बेहद गंभीर स्थिति में है और प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। अगर जल्द ही प्रदूषण पर काबू नहीं पाया गया, तो यह शहर के लाखों लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदल सकता है।

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