आज शाम करीब 7 बजे दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के बाहर एक कार में हुए जोरदार विस्फोट ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इस धमाके में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 24 से अधिक घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। लेकिन मुख्यधारा की मीडिया की हेडलाइंस से परे, यह घटना कोई इत्तेफाक नहीं लगती। आज सुबह ही फरीदाबाद में बरामद हुए 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री और दो कश्मीरी डॉक्टरों की गिरफ्तारी से जुड़े तार इस विस्फोट तक पहुंचते दिख रहे हैं – एक ऐसा कनेक्शन जो अभी तक किसी ने नहीं उजागर किया है।
विस्फोट की अनकही डिटेल्स: क्या था कार में?
चश्मदीदों के अनुसार, धमाका इतना शक्तिशाली था कि कार के परखच्चे 150 मीटर दूर तक उड़ गए, आसपास की स्ट्रीट लाइट्स टूट गईं और एक मंदिर के शीशे चटक गए। LNJP अस्पताल में पहुंचे शवों में से कुछ के अंग अलग-अलग पड़े मिले।ेंट। पुलिस सूत्र बता रहे हैं कि कार में अमोनियम नाइट्रेट आधारित IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) का इस्तेमाल हुआ, जो ठीक वैसा ही है जैसा फरीदाबाद में बरामद हुआ था। लेकिन मीडिया यह नहीं बता रही कि कार का मालिक एक संदिग्ध व्यक्ति था, जिसका नाम अभी गोपनीय है, लेकिन उसके मोबाइल रिकॉर्ड्स फरीदाबाद के गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल अहमद गनी और डॉ. आदिल अहमद राथर से जुड़े हुए हैं। ये दोनों जैश-ए-मोहम्मद से लिंक्ड बताए जा रहे हैं।
आज की गिरफ्तारियां: आतंक का जाल फैलता हुआ
आज ही गुजरात ATS ने हैदराबाद के एक डॉक्टर अहमद मोहियुद्दीन सईद और दो अन्य को गिरफ्तार किया, जिनके पास से ग्लॉक पिस्तौलें, बेरेटा, 30 कारतूस और रिसिन टॉक्सिन बनाने की सामग्री (कैस्टर ऑयल) बरामद हुई। ये ISIS-खोरासन से जुड़े हैं और पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मंगवा रहे थे। क्या दिल्ली का विस्फोट इनके प्लान का हिस्सा था? सूत्रों के मुताबिक, ये गिरफ्तारियां दिल्ली-NCR को टारगेट करने की बड़ी साजिश का हिस्सा हैं, लेकिन कोई मीडिया यह नहीं जोड़ रही कि फरीदाबाद का मटेरियल और दिल्ली का ब्लास्ट एक ही नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
इसके अलावा, हरियाणा पुलिस ने फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गनी के घर से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, हथियार और टाइमर बरामद किए। ये सामग्री दिल्ली में कई टारगेट्स पर हमले के लिए थी। विस्फोट के तुरंत बाद NSG और स्पेशल सेल की टीमें साइट पर पहुंचीं, लेकिन अभी तक आतंकी एंगल को “संभावित” बता कर टाला जा रहा है।
अनदेखा परिप्रेक्ष्य: क्यों टारगेट किया लाल किला?
मुख्यधारा मीडिया इसे “कार ब्लास्ट” या “सीएनजी सिलेंडर फटना” बता रही है, लेकिन ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी कुछ और कहानी बयां करती है। लाल किला सिर्फ टूरिस्ट स्पॉट नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता का प्रतीक है। 15 अगस्त को यहां PM भाषण देते हैं। इस विस्फोट की टाइमिंग संदिग्ध है – दिवाली के ठीक बाद और बिहार चुनाव के बीच। क्या यह पाकिस्तान-समर्थित मॉड्यूल की ओर से “संदेश” था? फरीदाबाद बरामदगी के ठीक 12 घंटे बाद यह ब्लास्ट हुआ, जो बताता है कि नेटवर्क अभी भी एक्टिव है और पुलिस की कार्रवाई से बच निकला एक हिस्सा ने हमला कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विस्फोट से पहले एक संदिग्ध कार घंटों से पार्क थी, और उसके ड्राइवर ने आसपास घूमते हुए रेकी की। CCTV फुटेज में एक व्यक्ति कार छोड़कर भागता दिख रहा है – यह डिटेल अभी तक किसी न्यूज चैनल ने नहीं दिखाई।
देशव्यापी अलर्ट और आगे का खतरा
दिल्ली, मुंबई, यूपी में हाई अलर्ट है। बॉर्डर्स पर नाकाबंदी, संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई। लेकिन सवाल यह है कि जब फरीदाबाद में इतना बड़ा कैश मिला, तो दिल्ली में हमला कैसे हो गया? क्या इंटेलिजेंस फेलियर है या कोई बड़ा मॉड्यूल अभी छिपा है?
यह विस्फोट बताता है कि आतंक का नेटवर्क शिक्षित लोगों (डॉक्टर्स) तक फैल चुका है, और रासायनिक हथियारों (रिसिन) का इस्तेमाल नई रणनीति है। सरकार को अब पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।


