राजस्थान की राजनीति में अंता विधानसभा उपचुनाव (Anta By-Election 2025) एक बार फिर सुर्खियों में है। 11 नवंबर को होने वाले इस मतदान ने सियासी पारे को गर्मा दिया है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मान चुकी हैं, लेकिन मुकाबला इस बार त्रिकोणीय है, क्योंकि निर्दलीय नरेश मीणा मैदान में हैं, जो कांग्रेस और बीजेपी दोनों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
कांग्रेस ने इस उपचुनाव को जीतने के लिए पूरा संगठन झोंक दिया है। पार्टी ने 56 नेताओं को 3-3 गांवों की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंच बनाकर माहौल तैयार किया जा सके। यह रणनीति कांग्रेस के लिए इसलिए अहम है क्योंकि अंता का बड़ा वोट बैंक ग्रामीण इलाकों में है और वहां स्थानीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने खुद इस अभियान की निगरानी संभाली है।

5 नवंबर को पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अंता में रोड शो करने वाले हैं, जो इस चुनाव का बड़ा सियासी इवेंट माना जा रहा है। पायलट की लोकप्रियता और युवा मतदाताओं पर उनका प्रभाव कांग्रेस के लिए ऊर्जा बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। पार्टी प्रमोद जैन भाया को फिर से जीत दिलाने की कोशिश में है, जो पहले भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं।


दूसरी ओर, बीजेपी ने मोरपाल सुमन को उम्मीदवार बनाया है, जो संगठन के पुराने कार्यकर्ता हैं और पार्टी की जमीनी पकड़ पर भरोसा करते हैं। बीजेपी के लिए यह चुनाव मुख्यमंत्री भावना भाटिया की नेतृत्व परीक्षा के समान है, क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस के मुकाबले संगठन को सक्रिय रखना पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
लेकिन सबसे दिलचस्प भूमिका निभा रहे हैं निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा, जो जातीय समीकरण को बदलने की ताकत रखते हैं। मीणा समुदाय की मजबूत संख्या अंता में निर्णायक है और नरेश मीणा की उम्मीदवारी कांग्रेस को सीधी चुनौती देती दिख रही है। यदि उन्होंने ग्रामीण वोटों में सेंध लगाई तो यह कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है और बीजेपी को अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस चुनाव में किसी एक पार्टी की लहर नहीं है। मुकाबला पूरी तरह से उम्मीदवारों की छवि, स्थानीय नेटवर्किंग और ग्रामीण वोटिंग पैटर्न पर टिकेगा। कांग्रेस ने संगठनात्मक एकजुटता दिखाने की कोशिश की है, वहीं बीजेपी जातीय समीकरण और नेतृत्व की ताकत पर भरोसा कर रही है।
14 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे, लेकिन अभी से अंता विधानसभा राजस्थान की राजनीति का सबसे चर्चित चुनावी मैदान बन चुकी है, जहां हर वोट सियासी समीकरण तय करेगा।


