शहर की सड़कें अभी अंधेरे में डूबी हुई थीं, जब सुबह के ठीक चार बजे एक ऐसी हलचल हुई जो किसी को महसूस भी न हुई। 400 पुलिसकर्मियों की 75 टीमें, बिना किसी शोर-शराबे के, 300 ठिकानों पर पहुँच गईं। कोई सायरन की आवाज़ नहीं, कोई फ्लैशिंग लाइट्स नहीं—सिर्फ हथकड़ियों की खनक और बदमाशों की आधी-अधूरी नींद। यह था ‘ऑपरेशन वज्र प्रहार’, जयपुर पुलिस की वह सर्जिकल स्ट्राइक जो अपराध के अनदेखे चक्र को तोड़ने के लिए रची गई। पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल के निर्देश पर शुरू यह अभियान न केवल 300 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में ले आया, बल्कि राजस्थान के अपराध परिदृश्य में एक नया मोड़ लाया। लेकिन इसकी असली ताकत क्या है? यह सवाल उठता है क्योंकि अन्य मीडिया केवल गिरफ्तारियों की संख्या गिन रहे हैं, जबकि यह ऑपरेशन अपराध के ‘चक्रव्यूह’ – यानी उन पैटर्न्स को निशाना बना रहा है जो शहरों को रातोंरात असुरक्षित बना देते हैं।
ऑपरेशन की शुरुआत भोर की गहराई में ही क्यों की गई, इसका जवाब मनोविज्ञान और डेटा में छिपा है। जयपुर पुलिस ने पहली बार ‘स्लीप साइकिल इंटेलिजेंस’ का इस्तेमाल किया, जहाँ मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों की सलाह से तय किया गया कि सुबह चार बजे अपराधियों की नींद सबसे गहरी होती है। इस समय उनका ‘अलर्ट सिस्टम’—चाहे वह मोबाइल हो या गार्ड—पूरी तरह बंद। परिणामस्वरूप, 300 में से 295 बदमाश बिना किसी प्रतिरोध के पकड़े गए। इनमें आर्म्स एक्ट के आरोपी, स्थायी वारंटी वाले फरार, नशा तस्कर और चेन स्नैचर शामिल थे। चारों डीसीपी—हनुमान प्रसाद (वेस्ट), राजश्री राज (साउथ), करण शर्मा (नॉर्थ) और संजीव नैन (ईस्ट)—की निगरानी में चली यह कार्रवाई जयपुर को न केवल साफ-सुथरा बनाने, बल्कि अपराध के चक्र को तोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। स्पेशल कमिश्नर (ऑपरेशन) राहुल प्रकाश ने कहा, “यह सिर्फ गिरफ्तारियाँ नहीं, अपराध की जड़ें उखाड़ना है। जयपुर को सेफ सिटी बनाने के लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं। जनता से अपील है कि संदिग्ध गतिविधि की सूचना 100 या 112 पर दें।”
राजस्थान में अपराध का चक्र समझने के लिए आंकड़ों पर नज़र डालें। एनसीआरबी 2023 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कुल 3,17,480 संज्ञेय अपराध दर्ज हुए, जो प्रति लाख जनसंख्या पर 390.4 की दर दर्शाते हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध 45,450 थे। 2024 में कुल अपराधों में 7.74 प्रतिशत की कमी आई, जबकि महिलाओं के खिलाफ मामलों में 19.6 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई—36,563 रह गए। हत्या के मामले 1,607 रहे। 2025 के जनवरी से अक्टूबर तक राज्य में अपराध 19 प्रतिशत से अधिक घटे। जयपुर में यह गिरावट और स्पष्ट है, जहाँ जनवरी-अक्टूबर 2025 तक कुल 20,766 मामले दर्ज हुए, जो 2024 के समान अवधि के 23,902 से 13 प्रतिशत कम हैं—3,136 मामलों की कमी। यह चक्र—रात के 2 से 5 बजे के बीच 68 प्रतिशत अपराध—अब टूट रहा है।
निम्न तालिका राजस्थान के प्रमुख शहरों/जिलों में अपराध के आंकड़ों की तुलना दर्शाती है (एनसीआरबी, राजस्थान पुलिस डेटा के आधार पर; 2024 पूर्ण वर्ष अनुमानित, 2025 जनवरी-अक्टूबर):
| शहर/जिला | 2023 कुल अपराध | 2024 कुल अपराध (अनुमानित) | जनवरी-अक्टूबर 2025 |
|---|---|---|---|
| राजस्थान कुल | 3,17,480 | 2,93,000 (-7.7%) | ~1,71,000 (-19%) |
| जयपुर | ~39,000 | ~28,500 | 20,766 (-13%) |
| जोधपुर | ~18,000 | ~16,500 | ~11,500 |
| उदयपुर | ~12,000 | ~11,000 | ~7,800 |
| कोटा | ~10,500 | ~9,700 | ~6,900 |
| बीकानेर | ~9,000 | ~8,300 | ~5,900 |
ये आंकड़े बताते हैं कि भजनलाल शर्मा सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं। जयपुर में चोरी 7,480 से घटकर 5,889, लूट 216 से 120, मोबाइल स्नैचिंग 273 से 139 हो गई। हत्या 89 से 82, बलात्कार 432 से 405। आर्थिक अपराधों में भी कमी। पुलिस ने 1.2 लाख सीडीआर का विश्लेषण कर एआई ‘क्राइम प्रेडिक्टर’ विकसित किया, जो 87 प्रतिशत सटीक है।
लेकिन यह चक्र समाज के ताने-बाने में बुनबुनाया है। जयपुर जैसे शहरों में चेन स्नैचिंग आम थी, लेकिन अब 42 प्रतिशत युवा अपराधी—सोशल मीडिया गैंगस्टर्स—पकड़े जा रहे। एससी/एसटी के खिलाफ अपराधों में भी कमी। एक वैशाली नगर निवासी महिला ने कहा, “रातें अब सुरक्षित लगती हैं, चैन की नींद आती है।” ‘नाइट वॉच ऐप’ से दुकानदार सहयोग कर रहे।
राजस्थान पुलिस का यह साइलेंट रिवॉल्यूशन अपराध के चक्र को तोड़ रहा है। आने वाले ‘ऑपरेशन निद्रा वज्र’ में ड्रोन और स्लीप यूनिट्स होंगे। जयपुर अब सुरक्षित नींदों का शहर बन रहा है।


